February 19, 2024

माननीय राज्यपाल बनवारीलाल ने लोगों से की ब्रह्माकुमारीज़ से जुड़ने की अपील

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चंडीगढ़

पंजाब के राज्यपाल बनवारीलाल ब्रह्माकुमारीज़ के कार्यक्रम में शामिल

सामाजिक परिवर्तन के लिए आध्यात्मिकता पे चर्चा

राज्यपाल ने लोगों से की ब्रह्माकुमारीज़ से जुड़ने की अपील

आज चंडीगढ़ के टैगोर थिएटर में ब्रह्माकुमारीज़ संस्था द्वारा संस्था के पंजाब ज़ोन के भूतपूर्व डायरेक्टर राजयोगी भ्राता अमीर चंद जी की  प्रथम पुण्यतिथि के उपलक्ष्य में एक कार्यक्रम रखा गया जिसमें पंजाब के महामहिम बनवारीलाल पुरोहित जी ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की। उनके अलावा आमंत्रित मेहमानों में जस्टिस जया चौधरी, गुरुग्राम के ओम शांति रिट्रीट सेण्टर की निदेशिका बीके आशा, गुलबर्गा से राजयोगी बीके प्रेम, पंजाब और चंडीगढ़ ज़ोन की डायरेक्टर बीके प्रेम और बीके उत्तरा मंच पर मौजूद रहे। मंच का सञ्चालन बीके डॉक्टर प्रताप मिड्ढा ने किया।  बीके जयगोपाल लूथरा ने अपने मधुर स्वर में एक भावभीने गीत से भ्राता जी को श्रद्धांजलि दी।

महामहिम श्री बनवारीलाल पुरोहित जी ने ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय को धर्म रुपी वृक्ष कि जड़ बताया जिनकी मानवता के प्रति अथक सेवाओं ने भारतीय संस्कृति को बचाये रखने और उसको आगे बढ़ानेके लिए सार्थक सहयोग दिया है। उन्होंने कहा कि मैं इस संस्था कि सेवाओं से अभिभूत हूँ और आज का यह गरिमामय कार्यक्रम ये दर्शाता है कि हमारी संस्कृति धर्म पर आधारित है और इसीलिए उसे कोई मुग़ल अँगरेज़ आदि कभी नष्ट नहीं कर पाए। उन्होंने स्वामी विवेकानंद जी के जीवन चरित्र से भी उपस्थित जनसमूह को प्रेरणा दी।

दो जुड़वां तोतों कि कहानी सुनाते हुए उन्होंने संस्कारों का महत्त्व बताया कि कैसे एक तोता डाकुओं के तथा दूसरा साधु संतों के गाँव में पला और जुड़वां होते हुए भी दोनों के संस्कार भिन्न थे। उन्होंने संस्था कि सराहना करते हुए कहा कि इस विश्वविद्यालय से अच्छी संगती भला कहाँ मिलेगी।

अंत में उन्होंने कहा कि भगवान में विश्वास, सादा जीवन, अच्छी संगत और अपने कार्यों में पारदर्शिता रखने से जीवन में परिवर्तन कि संभावना बढ़ जाती है। गाँधी जी का वचन कि कुदरत हमारी हर ज़रुरत को पूरा करती है लेकिन लालच को नही। बहुत ही उत्साह से उन्होंने संस्था को अपनी सेवाएं बढ़ाने को कहा कि आज राष्ट्र को ही नहीं, सम्पूर्ण विश्व को इनकी ज़रुरत है और भारत को विश्व गुरु बनने में इस विश्वविद्यालय का भरपूर सहयोग मिलेगा।

इसके अलावा जस्टिस दया चौधरी, राजयोगिनी प्रेम दीदी और राजयोगिनी उत्तरा दीदी ने भ्राता अमीर चंद जी को स्मरण करते हुए उनके प्रयासों कि सराहना कि और उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि दी। सभी का आग्रह यही था कि मानवता कि सेवा का जो रास्ता भ्राता जी दिखा गए हैं, हमें उसी पथ पर अग्रसर होना है। 

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